शराब नीति घोटाले को लेकर एक्शन में ED,दिल्ली-पंजाब समेत कई राज्यों में रेड

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के कथित शराब नीति घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम एक बार फिर एक्शन में आ गई है. शराब नीति घोटाले से जुड़े धन शोधन (Money Laundering) के मामले में ईडी की टीम तलाशी अभियान चला रही है. सूत्रों ने बताया कि ईडी के अधिकारी दिल्ली, पंजाब और हैदराबाद में 35 स्थानों पर छापेमारी कर रहे हैं. बता दें कि दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति को वापस ले चुकी है.

सूत्रों ने बताया कि कुछ शराब वितरकों, कंपनियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं की तलाशी ली जा रही है. ईडी (ED) इस मामले में अब तक 103 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है. मामले में पिछले महीने शराब व्यवसायी एवं शराब बनाने वाली कंपनी ‘इंडोस्पिरिट’ के प्रबंध निदेशक समीर महेंद्रू को गिरफ्तार किया गया था.

सीबीआई (CBI) द्वारा मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद ईडी ने धन शोधन का मामला दर्ज किया था. दिल्ली के उप-राज्यपालय वीके सक्सेना ने दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. उन्होंने इस मामले में 11 आबकारी अधिकारियों को निलंबित भी किया था.

शराब नीति घोटाले (Liquor Policy Scam) को लेकर चल रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘500 से ज्यादा रेड, 3 महीनों से CBI/ED के 300 से ज्यादा अधिकारी 24 घंटे लगे हुए हैं. एक मनीष सिसोदिया के खिलाफ सबूत ढूंढने के लिए. कुछ नहीं मिल रहा, क्योंकि कुछ किया ही नहीं. अपनी गंदी राजनीति के लिए इतने अधिकारियों का समय बर्बाद किया जा रहा है। ऐसे देश कैसे तरक्की करेगा?’

 

दिल्ली की एक कोर्ट ने दिल्ली सरकार द्वारा हाल ही में वापस ली गई आबकारी नीति (Delhi Excise Policy) में कथित अनियमितताओं से जुड़े धन शोधन ((Money Laundering) के मामले में गिरफ्तार शराब कारोबारी समीर महेंद्रू की हिरासत अवधि चार दिनों के लिए बढ़ा दी है. शराब वितरण कंपनी इंडोस्पिरिट के प्रबंध निदेशक समीर महेंद्रू को आठ दिनों की हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार (6 अक्टूबर) विशेष न्यायाधीश एम. के. नागपाल की अदालत में पेश किया था, जिन्होंने हिरासत अवधि को चार दिनों के लिए बढ़ा दिया.

कोर्ट ने ईडी द्वारा दी गई अर्जी के आधार पर यह आदेश पारित किया, जिसमें आगे की पूछताछ के लिए आरोपी को और कुछ दिन हिरासत में रखने की जरूरत बताई गई थी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, आबकारी नीति के उल्लंघन से सबसे ज्यादा फायदा पाने वालों में महेंद्रू भी शामिल हैं, क्योंकि वह ना सिर्फ शराब बनाने की इकाई चला रहे थे बल्कि उन्हें रिश्तेदारों के नाम पर थोक और कुछ खुदरा दुकान का लाइसेंस भी दिया गया था. अभियोजन का दावा है कि इन कथित अनियमितताओं और उल्लंघनों के कारण महेन्द्रू ने करीब 50 करोड़ रुपये कमाए हैं.

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