रामनवमी-विपक्ष को नजर आई हिंदुत्व का जनाधार बढ़ाने की साजिश,बीएचपी ने दिया यह जवाब

रामनवमी पर देश के अलग-अलग हिस्सों में बवाल हुआ। पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, गुजरात, झारखंड सहित अनेक राज्यों में रामनवमी पर निकाली गई शोभायात्रा पर पथराव हुआ और हिंसा की गई तो जेएनयू में भोजन में मांस परोसे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्ष का आरोप है कि इन हमलों के पीछे सुनियोजित साजिश है। भाजपा इसके माध्यम से हिंदू वोटरों के बीच अपना जनाधार बढ़ाने व बेलगाम महंगाई छिपाने की कोशिश कर रही है। वहीं, भाजपा का कहना है कि यह हिंदुओं की आस्था पर हमला है।

उधर, कांग्रेस नेता ऋतु चौधरी का मानना है कि भाजपा की यह कोशिश अब कामयाब नहीं होने वाली। इसकी बड़ी वजह है कि केंद्र सरकार लंबे समय से यही चाल चलकर अपनी साख बचाने की कोशिश करती आ रही है। जनता को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है, लिहाजा अब उसकी चाल कामयाब नहीं होने वाली और इन प्रयासों से उसे कोई सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले विधानसभा चुनावों में और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को सफलता नहीं मिलने वाली है।

भारत हिंदू परिषद के संस्थापक अध्यक्ष आशीष सिंह राजपूत ने कहा कि रामनवमी की शोभायात्राओं पर हमले उन्हीं जगहों पर हुए हैं जहां एक विशेष वर्ग की आबादी बहुत ज्यादा रहती है। इस तरह की हरकतें यह साबित करती हैं कि एक वर्ग विशेष को आज भी हिंदुओं की पूजा-पद्धति से घृणा है और वे इन हमलों के जरिए अपनी घृणा को प्रदर्शित कर रहे हैं।

इन हमलों के जरिए हिंदू मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिश के सवाल पर आशीष सिंह राजपूत ने कहा कि सच्चाई तो यह है कि कांग्रेस ने समय-समय पर मुस्लिम और हिंदू मतदाताओं के ध्रुवीकरण की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुस्लिम तुष्टीकरण की शुरूआत आजादी के बाद से लेकर शाहबानो प्रकरण और डॉ. मनमोहन सिंह के बयानों तक में साफ दिखाई पड़ती है।

उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कांग्रेस ने समय-समय पर हिंदुओं के तुष्टीकरण की कोशिश भी की। राजीव गांधी का अयोध्या में रामलला के मंदिर से ताला खोलना, अयोध्या से ही अपनी चुनाव यात्रा शुरू करना और अब राहुल गांधी का स्वयं को ब्राह्मण प्रमाणित करने की कोशिश करना कांग्रेस की इसी नीति का उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि विपक्ष यह नहीं बताता कि हिंदुओं की शोभायात्रा पर करौली में हिंसा क्यों हुई? उलटे राजस्थान के मुख्यमंत्री हमलों को सही ठहराने की कोशिश भी करते हैं। यूपी में गोरखनाथ मंदिर पर मुर्तजा के हमले की आलोचना करने की बजाय अखिलेश यादव जैसे नेता आरोपी को ही बचाने की कोशिश करते दिखते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष की इन्हीं हरकतों से हिंदुओं में इनके प्रति नाराजगी बढ़ रही है। 

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